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ब्लॉग्स (9)

-"जीवन के चमत्कारों से तो मैं यूं भी अभिभूत हो रही थी| ऊपर से उन पर मोहर लगाने के लिए जब कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं कि अस्तित्व के समक्ष अहोभाव से भर जाती हूँ..... शब्द खो जाते हैं ........ समय विलुप्त होने लगता है.... मेरा मैं खोने लगता है और जीवन के ... आगे पढ़ें...

तुम कैसे हो? मैं अच्छा हूँ? वो भी अच्छी है ना? हाँ फिर? फिर क्या? दो अच्छे लोग मिले, प्यार हुआ शादी की, फिर? वो पहले भी लड़की थी आज भी लड़की है। तो क्या हुआ प्यार तो अब भी है ना? मैं नहीं जानता अब कि प्यार किसे कहते है, इसलिए कह नहीं सकता कि प्यार है या ... आगे पढ़ें...