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आकर्षण की सीमा के परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे दिखाई देते हो मेरी रात के चन्द्रमा की तरह जो मेरे अंतःसागर में हो रहे ज्वार-भाटे को नियंत्रित किये हुए भी तटस्थ रहता है अपने आसमां में, विचारो की सीमा से परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे ... आगे पढ़ें...