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ब्लॉग्स (5)
-"जीवन के चमत्कारों से तो मैं यूं भी अभिभूत हो रही थी| ऊपर से उन पर मोहर लगाने के लिए जब कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं कि अस्तित्व के समक्ष अहोभाव से भर जाती हूँ..... शब्द खो जाते हैं ........ समय विलुप्त होने लगता है.... मेरा मैं खोने लगता है और जीवन के ... आगे पढ़ें...

"मै एक इंसान हूं, मेरी भी कोई इच्छा- अनइच्छा है| यह बात मैं किसी को कैसे समझाऊं| पिताजी के अनुसार मैं अकेली रह कर खराब हुई जा रही थी| लोग बड़ी आसानी से स्त्रियों को खराब की उपाधि दे देते हैं| खराब होना किसे कहा जाता है? पुरुष के साथ संपर्क होने से ... आगे पढ़ें...

ज़िंदगी को यदि किसी इनसानी रिश्ते का नाम देना हो, तो आप किस रिश्ते को सबसे ज्यादा ज़िंदा मानते हैं? आगे पढ़ें...