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ब्लॉग्स (2)
लोगों के घर में रहता हूँ कब अपना कोई घर होगा दीवारों की चिंता रहती है दीवार में कब कोई दर होगा सब्जी मंडी बाप का घर पुलबंगश पे मामा का श्याम नगर में चाचा का चौक पे अपनी श्यामा का मायके और ससुराल के आगे और भी कोई घर होगा लोगों के घर में रहता हूँ... इच्छाओं ... आगे पढ़ें...

ख़ुद से बातें करते रहना आँखें मूंदे दिन में मीठी रातें भरते रहना ख़ुद से कहना, जाती हूँ मैं ख़ुद से कहना, आई मैंऐसा भी तो होता है ना हल्की-सी तन्हाई में तस्वीरों में चेहरे भरते रहना ख़ुद से बातें करते रहनाभीगे-भीगे मौसम में क्यों बरखा प्यासी लगती है जी तो ख़ुश ... आगे पढ़ें...