
ख़ुद से बातें करते रहना आँखें मूंदे दिन में मीठी रातें भरते रहना ख़ुद से कहना, जाती हूँ मैं ख़ुद से कहना, आई मैंऐसा भी तो होता है ना हल्की-सी तन्हाई में तस्वीरों में चेहरे भरते रहना ख़ुद से बातें करते रहनाभीगे-भीगे मौसम में क्यों बरखा प्यासी लगती है जी तो ख़ुश ...
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