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टैग्स: कृमेशा


ब्लॉग्स (1)
कई बार क़लम उठती नहींसफेद चादर पर लोट लगाती हैअलसाती है यूं मानो रात भर की जागी हुई होजैसे रात भर सोने न दिया हो उसेबहुत से काम अब भी बाकी हैंसुबह उठना तो होगाऔर पूरे करने होंगे कुछ ज़रूरी काम वैसे भी बहुत कुछ हैजो सिर्फ़ कलम के बस का हैजैसे दिन को रातऔर ... आगे पढ़ें...