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ग़मज़दा रातों की नई कहानी नहीं होती बहते आँसुओं की कोई निशानी नहीं होती लोग बस देखते हैं और मुस्कुराकर निकल जाते हैं दीवानों पर कोई मेहरबानी नहीं होती फिर भी न जाने क्यूँ दिल एक आस लगाए रहता हैहोठों पर झूठी मुस्कुराहटें सजाए रहता है आधी रात को जगाकर मुझको ... आगे पढ़ें...