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टैग्स: अमृता


ब्लॉग्स (6)
मेरे बच्चों, किस नाम से पुकारूं तुम्हें? किमी, अवि या वो नाम जो मैंने तुम दोनों को बचपन में दिए थे..... लेकिन सिर्फ़ कुछ लोगों के कारण ज़िद में आ कर बदलना पड़े थे... और वो नाम थे "चुनमुन" और "रिमझिम"...किमी, आज से तुम्हें फिर चुनमुन कह के पुकारने का मन ... आगे पढ़ें...

-"जीवन के चमत्कारों से तो मैं यूं भी अभिभूत हो रही थी| ऊपर से उन पर मोहर लगाने के लिए जब कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं कि अस्तित्व के समक्ष अहोभाव से भर जाती हूँ..... शब्द खो जाते हैं ........ समय विलुप्त होने लगता है.... मेरा मैं खोने लगता है और जीवन के ... आगे पढ़ें...

कई हजार चाबियाँ मेरे पास थीं और एक-एक चाबी एक-एक दरवाज़े को खोल देती थीं दरवाज़े के अंदर किसी के सोने का कमरा भी और घरवालों के दुख जो उनके ही होते थे, पर किसी समय मेरे भी होते थे मेरी छाती की पीड़ा की तरह पीड़ा, जो दिन के समय जागूँ, तो जाग पड़ती थी, पर फिर भी ... आगे पढ़ें...