बहुत अजीब सा ख्वाब था वो, कहीं दूर पहाड़ों पर, सफेद फूलों के बीच सुंदरता मुस्कुरा रही थी, सूरत में ताज़गी और सीरत में पवित्रता की लौ झिलमिला रही थी। मैं ज्यों-ज्यों उसकी तरफ बढ़ती वो हँसते हुए मुझसे दूर भाग रही थी। जब तक मेरे और सुंदरता के बीच में दूरी थी ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 24 अप्रैल, 2008 5:28:00 PM IST पर पोस्टेड
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बर्फ से ढँकी वादियाँ मैं और तुममैं मैं ही थी तुम तुम ही थे लेकिन चेहरा एक ही था .... मैं बात करूँ तो मेरा चेहरा, तुम बातो करो तो तुम्हारा............... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 24 अप्रैल, 2008 5:26:00 PM IST पर पोस्टेड
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भावनाएँ मंदिर में जलती अगरबत्ती की तरह होती हैं, जो खुद जलकर दूसरों को खुशबू देती हैं। और ये भावनाएँ हरेक के अंदर होती हैं बस फर्क इतना है कि कोई जलता हुआ दिख जाता है तो कोई अपनी आग अंदर ही छुपा लेता है। कौन जलता है और कौन छुपाता है? जो अपनी भावना व्यक्त ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 19 अप्रैल, 2008 12:05:00 PM IST पर पोस्टेड
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रात एक ख्वाब देखा कि मैं जो कुछ भी छू रही हूँ सब पिघल रहा है..........दिन भर के किस्सों को याद करती रही ताकि उस सपने का कारण खोज सकूँ....फिर याद आया सुबह तुमसे हाथ मिलाया था.............. और पढ़ें...