मैंने तुम्हें पाया ऐसेजैसे रात ने ख्वाब को सुबह होने से पहले हीचाँद को लौटा दिया हो मैंने तुम्हें पाया ऐसे जैसे कल रात चाँद के घर से सूरज तुम्हें ले आया होऔर मैं सुबह खिड़की खोलना भूल गया और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 16 अप्रैल, 2008 11:48:00 AM IST पर पोस्टेड
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क्या आपने खुशी को छूकर देखा है? नहीं ना? उसका कोई रूप नहीं होता। आप जब खुश होना चाहते हैं, तो उसे किसी भी रूप में ढालकर खुश हो जाते हैं। ये आपके अंदर की तरंगे हैं, जो जब दिल से निकलती हैं तो चेहरा भी रोशन हो जाता है। वर्चुअल हैप्पिनेस कभी देखी नहीं, अचानक ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 5 अप्रैल, 2008 6:11:00 PM IST पर पोस्टेड
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I saw her at extreme Of love And hatred tooWhen she lovesThe Sun rises And melts in her warmthDay becomes goldenAnd night falls in armsWhen she hatesThe Sun denies risingMoon denies shiningBefore anybody can call the LoveEarth dissolves और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 5 अप्रैल, 2008 2:54:00 PM IST पर पोस्टेड
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तुमने एक ही पलड़े में रख दियासमय को, बातों को, शिकायतों को और दूसरे पलड़े में डालती रही प्रेम टुकड़ों-टुकड़ों मेंऔर कहती रही देखो तुम्हारे प्रेम का पलड़ा हलका हो चुका है। मैं अपनी खामोशियों को लेकर खड़ा रहा यह सोचकर कि इसे किस पलड़े में डालूँ एक और वो बातें हैं ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 1 अप्रैल, 2008 4:17:00 PM IST पर पोस्टेड
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तुम्हें दिया था मैंने वो हककि तुम कह सको वह बात जो मुझे शिकायत लगती है और तुम्हें बैचेनी बजाय इसके कि हम साथ रहकर देते रहें झूठी मुस्कुराहटेंया सच्ची खामोशी आँखों में अजनबियत और हाथों में उदास स्पर्श लिएलौटने से अच्छा है तुम कह दो वो बात जो मुझे शिकायत ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 24 मार्च, 2008 6:21:00 PM IST पर पोस्टेड
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वो उष्मा थी या ऊर्जा नहीं जानता बस एक स्पर्श से मैंने ख़्वाहिशों को जलते देखा है एक आग जो राख नहीं करती मैंने दिल के पत्थर को कुंदन में बदलते देखा हैवो हँसती है तो सूखी नदी भी उन्मादित होकर बह उठती हैवो उदास थी........ मैंने समन्दर को सिकुड़ते देखा हैवो छू ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 24 मार्च, 2008 3:28:00 PM IST पर पोस्टेड
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मुझे पूरा करने के लिए.....एक बार मुझ पर अपनी परछाई पड़ जाने दोएक जो खाली-सा एहसास है उसे भर जाने दोजिसका धुँआ भी खोजता है ठीकानामुझे उस धुप बत्ती की तरह जल जाने दो उँगलियों की सरसराहटख़्वाहिशों का बहक जाना, देह की सुगंध का आत्मा को छू जाना तेरे नाम से जुड़ना ... और पढ़ें...