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श्रेणियाँ: दो दुनिया


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ब्लॉग्स (35)
कई दिनों से चेहरा नहीं देखा लेकिन शायद खुशी ऐसी ही होती है कनखियों से झाँकती है कभी लबों को चूमती है मैं झूम जाऊँ दुपट्टे में तो मेरे गले लिपटती है इठलाती है मेरी चूड़ियों में मेरी पायल में खनकती है एक चेहरे से दूसरे चेहरे में छुपकर मुझसे उलझती है एक ... और पढ़ें...

हर शाम दामन बचाकर निकल जाती हूँ फिर भी कोई धागा छूट गया सा लगता है.... जैसे कल छोड़ गई थी पुरानी बातों का एक किस्सा...एक अधूरा सा किस्सा.. इस उम्मीद में कि तुम आवाज़ लगाओगे और मैं पलट कर मुस्कुरा दुंगी तुमने पुकारा नहीं लेकिन मैं रात भर मुस्कुराती ... और पढ़ें...

बहुत बडे नही होते ज़िंदगी के सपने बस नींदे कम पड जाती है ज्यादा की ज़रूरत नही होती, कम समय में ही मुश्किले गुज़र जाती है तेरा होना ही काफी होता तो इस जहान में कहीं भी हो सकता था तू तेरा मेरे साथ होना, हथेली में कुछ लकीरें और जुड जाती है, कभी बहकाती है ... और पढ़ें...

आकर्षण की सीमा के परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे दिखाई देते हो मेरी रात के चन्द्रमा की तरह जो मेरे अंतःसागर में हो रहे ज्वार-भाटे को नियंत्रित किये हुए भी तटस्थ रहता है अपने आसमां में, विचारो की सीमा से परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे ... और पढ़ें...

तुम सच के धरातल पर खड़े किसी महात्मा की मूरत की तरह जिसको लोग नमस्कार कर आगे बढ़ जाते हैं एक और झूठ बोलने के लिए, मैं कल्पना के आसमान में उड़ती अदनी-सी चिड़िया। तुम सच के विकृत रूप को निडरता से स्वीकार करने वाले रोशनी से भरपूर दिन मैं सपने के सच हो जाने के ... और पढ़ें...

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