अपने भीतर की सर्द रातों में अकसर तन्हाई का लिहाफ ओढ़ लेती हूँ जुनून की राह से गुजरती यादों को हाथ बढा कर रोक लेती हूँ सुनाती हूँ किस्से उन चंद लम्हों के जो उम्र से जुड़कर जीवन हो गए फिर उसी जीवन से कुछ हादसे चुराकर नई कहानी जोड़ लेती हूँ घूमकर आती ... आगे पढ़ें...
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ले चलो............ एक ऐसी जगह जहाँ मुझे दिखाई न दे भूख के पैबंद वाला मखमली जिस्म, ले चलो............. एक ऐसी जगह जहाँ सच कड़वा न हो, झूठ की मिठास से न आती हो उबकाई ले चलो.......... एक ऐसी जगह जहाँ ख़्वाब महकते हो लेकिन हक़ीकत से न आती हो दुर्गंध ... आगे पढ़ें...
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भावनाएँ जब शब्दों में ढल जाती हैं तो मुकम्मल हो जाती है। यह कुछ शब्द यकायक ही ज़ुबां पर आ गए जब किसी ने मुझसे कहा कि जो दिल में है उसे कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं, आप ही कह दो। बहुत मुश्किल होता है अवर्णित प्रेम को वर्णित करना और वो भी उस व्यक्ति की ... आगे पढ़ें...
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वो जिद करती रही मैं खुश हूँ, तो खुशी को परिभाषित करूँ, मैं कहने ही वाली थी कि मेरी आँखें भर आई। मन प्रसन्न रहता है, तो शब्द चैन की नींद सो जाते हैं। ये बात मैं उसे नहीं समझा सकती थी। मेरी आँखों के आँसूं से वह मेरे खुश या उदास रहने का अनुमान लगाती रही। ... आगे पढ़ें...
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रात की चादर पर चुभता-सा ख़्वाब हुआ करता था कभी अब तकिया भी नींद में सराबोर-सा लगता है उजली रात के आसमान पर तारे भटकते थे कभी आज चाँद भी घर लौट आया-सा लगता है एक तन्हाई, दो बातें बस इतना-सा सामान है मेरे पास यादों की छत पर भी जाला-सा दिखता है आखरी ... आगे पढ़ें...
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प्रेम का उजाला जब रात की देह में घुल जाता है.... तो कोई चेहरा नही दिखता बस शांत मन से बिछड़कर देह में शोर मचाता है........... अकेले जीने की जिद में सारे चेहरे धुंधले पड़ जाते है जब कभी कोई याद का चेहरा करीब आता भी है तो पहचानने में समय लग जाता है फिर याद ... आगे पढ़ें...
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बरसों-से फैले रेगिस्तान में आखरी बूँद उम्मीद की कि कोई आएगा मरिचिका को पार कर अपने हाथों में प्रेम का पानी लिए और मैं उसे अपनी आँखों में भर लूँगी कि मिलन की अंतिम घड़ी में लब सूखे भी हो तो चलेगा आँखों से नमी नहीं जानी चाहिए.................. आगे पढ़ें...
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मैं अपने ही जीवन की मूक दर्शक अकसर देखती हूँ समय को अपने पास से गुज़रते हुए और जाते हुए एक और दिन को उसी तरह नीरस और नीर्जिव जैसे तुम अकसर निकल जाते हो मेरे करीब से और मैं खड़ी रह जाती हूँ उस पल की प्रतीक्षा में जो जीवित कर जाए उम्र के उस हिस्से को ... आगे पढ़ें...
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कई रात जगाया इन आँखों को, अब ख़्वाब देखना आता नहीं कोई बरबस ही पानी भर आता था उस गहरे कुँए से झाँकता नहीं कोई मन के खाली बर्तन में धूल जम जाती है खाली से आँगन से धूप लौट जाती है सूरज फिर भी धकेल दिया जाता है अलसाते चाँद को रह रह कर जगाता नहीं कोई ... आगे पढ़ें...
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प्रेम एक बच्चे की ड्राँइंग कॉपी जैसा, पेंसिल और रंगो को हाथ में लेकर उसके जो मन में आता है बनाता है, उसमें तरह-तरह के रंग भरता है। उसकी कल्पना को कोई नहीं पकड़ सकता। वो चाहे तो जोकर बना दे, चाहे तो हाथी, चाहे तो एक छोटा-सा घर और आसमान में उड़ती ... आगे पढ़ें...
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तलब जिस्मानी नहीं, रूह से एक कसक उठी और दौड पडी हैं रग़ो में तड़प बनकर मैंने अपनी तड़प का चाँद बेचकर तेरे इश्क का आसमां खरीद लिया सोचकर कि तू जब भी बरसेगा मेरी तलब के लबों को दो बूँद नसीब होगी या रब ! ये कैसा इम्तिहां है कि जिस्म बाग़ी नहीं मगर रूह ... आगे पढ़ें...
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एक दिन यूँ ही तन्हा रातों के अंधियारो से उजालों का पता पूछ लिया मेरी डायरी के पन्ने फड़फड़ाने लगे, उनींदी सी नज़रो से तेरे घर के पते को देखा और कब आँख लगी पता न चला , सुबह सूरज की किरणों को अपने पंखो में समेट कर उम्र की तितली को खिड़की से आते हुए देखा, ... आगे पढ़ें...
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कल रात मेरी बाहों के दर्पण में तुम एक अक्स बनकर आए और चुराकर ले गये रात के जंगल से नींद की तितलियाँ सुबह से बैठी हूँ दर्पण के सामने कि मेरे ख्वाबों को शक्ल नसीब हो........... आगे पढ़ें...
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रात तेरी याद का चाँद खिला चाँदनी को आँगन में फैला आई हूँ जैसे तन के जंगलों से गुजरकर मन के घर रहने आई हूँ ढूँढने निकली थी जंगलों में दास्तां के दरख्त को, जब लबों से लगाया तो लगा खामोशी के पेड से कोई हर्फ तोड लाई हूँ इंतज़ार के बादलों का रूख बदल दिया, ... आगे पढ़ें...
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वह परियों की कहानी-सी मेरे जीवन में आई और मैं एक छोटी बच्ची की तरह उसमें खो गई। चाँद के नगर में चाँदनी की बारिश, सूरज के रथ पर सपनों की सवारी, गुड्डे-गुड्डियों की शादी और मेरा खोया हुआ बचपन................... आगे पढ़ें...
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