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  श्रेणियाँ > दो दुनिया  (35)

हर इनसान अपने अंदर दो दुनिया जीता है, एक जो सबको दिखाई देती है, दूसरी जहाँ वह छुपा रहता है..........

• दो दुनिया

दो दुनिया के बीच की बैचेनी को सुकून तक पहुँचाने वालेहर उस लफ्ज़ की मैं कर्ज़दार हूँ जो तुम्हारे लबों से शिकायत बनकर निकले......   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• अतीत

कल तुमने मुझे उस वक्त छुआ था जब मैं याद कर रही थी वो दिन जब स्पर्श भटक जाया करते थे राह से और मेरी रूह तक लौटने से पहले ही दम तोड़ देते थेतभी तो तुम्हें वो काँटों की तरह चुभे थेऔर मैंने आँखों को मुस्कुराहट से ढँक दिया थाताकि तुम उस लहू को न देख पाओ जिसके ...   और पढ़ें...
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• मैं और मेरा ब्लॉग

मेरे ऑफिस में मैं जिस खिड़की के पास बैठती हूँ, शाम को ढलते सूरज की गर्मी से मेरा बाँया हिस्सा उस गर्मी में तप जाता है और दाएँ हिस्से से आती ए सी की ठंडक से दाँया हिस्सा पूरी तरह से ठंडा हो जाता है। तापमान के इस अंतर को एक साथ अनुभव करना बिलकुल उसी तरह है, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• शाम होते होते

http://shaifaly.mywe...   और पढ़ें...
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• वो दिनभर ढूँढती रही ठिकाना

वो दिनभर ढूँढती रही ठिकाना मेरी बातों की सरज़मीं परऔर मैं उसे खामोशी की बाँहों में लिए भटकता रहा कि कुछ हर्फ किसी राह से मिल जाए और मैं बता सकूँ कि मेरा इश्क वो नहीं जो तुम्हारी बाँहों से फिसलकर लबों पर अटका रहे उसे मैंने जलते अँगारों पर रखा है जिसमें ...   और पढ़ें...
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• शाम होते होते

उस रोज़ शाम होते होते बैचेनी ने अजीब रूप अख़्तियार कर लिया था उँगलियाँ की-बॉर्ड पर चल रही थीं बातें मन की सतह पर मॉनीटर पर अक्षरों के बदले दिखाई देने लगी थीं उलझने बार-बार डिलिट करने पर भी यादें उन्हीं बातों पर आकर बैठ रही थींजिन्हें मन की गहराई में जाने की ...   और पढ़ें...
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• इबादत

कुछ संकेत खुदा की तरफ से थे कुछ रूह को छूती हुई आवाज़ें थी कुछ खलाओं से टकराकर लौट आई पुकारें कुछ मन को भेदती हुई तलबऐसे ही पलों में तुझे देखाइश्क में सराबोर मैं उलझा हुआ हूँ मन के भीतर से निकलते दोराहे में, जो एक तुझ तक जाता है दूजा उस खुदा तक.....जानते ...   और पढ़ें...
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• ख्वाब जो पूरा होगा

उसकी बाँहों से फिसलकर कोई ख्वाब लबों पर उलझ गया मैं रूह से कसक उठने का इंतज़ार करती रही वो सजदे में कह गयाकोई एक ख्वाब जो पूरा न हुआ हो कभीमुझसे कहना, मैं अपनी हक़ीकत लूटा दूँगा……………   और पढ़ें...
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• अर्ज़ किया है...

सतही हो जाता है, जब दिन भीड़ में गुज़र जाता है, मैं तेरी गहराई को नाप सकूँ काश वो तन्हाई मेरे साथ होती!! -शैफाली   और पढ़ें...
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• उसकी लड़ाइयाँ

उसकी वो बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ उन लड़ाइयों के पीछे छोटे-छोटे कारणमेरा उसको समझाना और उसका झट से मान जाना....... रिश्ता अपेक्षाओं से उपर उठ चुका था लेकिन उपेक्षा से नहीं...............ब...   और पढ़ें...
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