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  श्रेणियाँ > अमृता और ओशो  (14)

कभी-कभी खूबसूरत खयाल खूबसूरत शरीर भी धारण कर लेते हैं- इमरोज़

• आत्ममिलन

http://shaifaly.mywe...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• अमृता-इमरोज़ के प्रेम पत्र से.....

किसी तारीख़ को

अपनी एक दोस्त के लिए एक किताब खरीदने गई थी। चाहे जितनी किताबे छान लूँ, नज़रे दो ही जगह होती है या तो ओशो या अमृता प्रीतम। कई दोस्त टोक चुके हैं- दुनिया में और भी बहुत कुछ है पढ़ने के लिए, अब निकलो इन दोनों से। मैं बस कह देती हूँ- खुद से निकल कर कहाँ ...   और पढ़ें...
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• एक घटना

-अमृता प्रीतम

तेरी यादेंबहुत दिन बीतेजलावतन हुईंजीतीं हैं या मर गयीं-कुछ पता नहींसिर्फ एक बार एक घटना हुई थीख्यालों की रात बड़ी गहरी थीऔर इतनी स्तब्ध थीकि पत्ता भी हिलेतो बरसों के कान चौंक जाते..फिर तीन बार लगाजैसे कोई छाती का द्वार खटखटायेऔर दबे पांव छत पर चढ़ता कोईऔर ...   और पढ़ें...
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• “मैं तुम्हें फिर मिलूँगी”

अमृता प्रीतम

I will meet you yet againHow and Where?I know notPerhaps I will become afigment of your imaginationand maybe spreading myselfin a mysterious lineon your canvasI will keep gazing at youPerhaps I will become a rayof sunshine to beembraced by your coloursI ...   और पढ़ें...
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• आत्ममिलन

मेरी सेज हाजिर हैपर जूते और कमीज की तरहतू अपना बदन भी उतार देउधर मूढ़े पर रख देकोई खास बात नहींबस अपने अपने देश का रिवाज है……-अमृता प्रीतम   और पढ़ें...
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• हादसा

बरसों की आरी हंस रही थीघटनाओं के दाँत नुकीले थेअकस्मात एक पाया टूट गयाआसमान की चौकी पर सेशीशे का सूरज फिसल गयाआँखों में कंकड़ छितरा गयेऔर नजर जख्मी हो गयीकुछ दिखायी नहीं देतादुनिया शायद अब भी बसती है-अमृता प्रीतम   और पढ़ें...
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• याद

आज सूरज ने कुछ घबरा कररोशनी की एक खिड़की खोलीबादल की एक खिड़की बंद कीऔर अंधेरे की सीढियाँ उतर गया….आसमान की भवों परजाने क्यों पसीना आ गयासितारों के बटन खोल करउसने चाँद का कुर्ता उतार दिया….मैं दिल के एक कोने में बैठी हूँतुम्हारी याद इस तरह आयीजैसे गीली लकड़ी ...   और पढ़ें...
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• एक मुलाकात

मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थीसिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जानेक्या ख्याल आयाउसने तूफान की एक पोटली सी बांधीमेरे हाथों में थमाईऔर हंस कर कुछ दूर हो गया हैरान थी….पर उसका चमत्कार ले लियापता था कि इस प्रकार की घटनाकभी सदियों में ...   और पढ़ें...
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• प्रेम, प्रतीक्षा, प्रणय और परमात्मा

मेरे दोस्तों से तुम्हें कोई शिकायत नहीं? अब नहीं पहले तो हुआ करती थी हाँ जब तुम सिर्फ दोस्त थीऔर अब?कुछ भी नहीं मतलब, तुम्हें मुझसे प्यार नहीं हुआ करता था, अब नहीं और जो शादी का वादा? वो हम करेंगे जब तुम्हें प्यार नहीं तो शादी क्यों करोगे क्योंकि अब मैं ...   और पढ़ें...
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• परिवार ओशो की नज़र से

परिवार जैसा आज तक रहा है, उस परिवार को ठीक से समझने के लिए यह ध्यान में रख लेना जरूरी है कि परिवार का जन्म प्रेम से नहीं, बल्कि प्रेम को रोक कर हुआ है। इसीलिए सारे पुराने समाज प्रेम के पहले ही विवाह पर जोर देते रहे हैं। सारे पुराने समाजों का आग्रह रहा है ...   और पढ़ें...
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