 वफ़ा तो अंतर्मन के खिल जाने की महक का नाम होता है, लेकिन दुनियावालों ने इसे इतने छोटे अर्थों वाला बना दिया कि यह सिर्फ फ़तवों के लिए रह गया| सुख बस्ती हिप्पोक्रेसी का माथा सिर्फ तेवरों से वाक़िफ़ होता है, माथे की कोई लौ उसका नसीब नहीं बनती.......कटु ... आगे पढ़ें...
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 परमात्मा की योजना बहुत व्यवस्थित होती है, लेकिन हम उसकी योजना से अनभिज्ञ होते हैं इसलिए दुःख और पीड़ा से घिरे रहते हैं| यदि इंसान सिर्फ़ इस इकलौते सच को स्वीकार कर लें कि सारी चीज़ें अपने नियत समय पर उस परम योजना के अनुसार होना तय है तो संसार से दुःख और ... आगे पढ़ें...
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 आव्हान मंत्र ध्यानं यासा पद्मासनस्था, विपुल कटि तटि पद्म पत्रायताक्षि,गम्भीरा... आगे पढ़ें...
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मैं मुक्ति की आकांक्षा की परिणति हूँबूँद भर आँखों में सागर को उड़ेल देने का स्वप्न,और गज भर आँचल में वृहद समाज के लांछनों को ढोने पर भीउसके छूट जाने काया फट जाने का संदेह मुझे विचलित नहीं करता,न ही रोकता है मेरे पैरों को जो शांत श्वासों की थाप पर नृत्य ... आगे पढ़ें...
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 सिर्फ़ औरतमैं औरत थी, चाहे बच्ची-सी, और यह खौफ़-सा विरासत में पाया था कि दुनिया के भयानक जंगल से मैं अकेली नहीं गुज़र सकती, और शायद इसी भय में से अपने साथ के लिए मर्द के मुंह की कल्पना करना- मेरी कल्पना का अंतिम साधन था..... पर इस मर्द शब्द के मेरे अर्थ ... आगे पढ़ें...
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 टोपी शुक्ला- राही मासूम रज़ा भूमिकामुझे यह उपन्यास लिख कर कोई ख़ास खुशी नहीं हुई| क्योंकि आत्महत्या सभ्यता की हार है| परन्तु टोपी के सामने कोई और रास्ता नहीं था| यह टोपी मैं भी हूं और मेरे ही जैसे और बहुत से लोग भी हैं| हम लोग कहीं न कहीं किसी न किसी अवसर ... आगे पढ़ें...
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 मेरे बच्चों, किस नाम से पुकारूं तुम्हें? किमी, अवि या वो नाम जो मैंने तुम दोनों को बचपन में दिए थे..... लेकिन सिर्फ़ कुछ लोगों के कारण ज़िद में आ कर बदलना पड़े थे... और वो नाम थे "चुनमुन" और "रिमझिम"...किमी, आज से तुम्हें फिर चुनमुन कह के पुकारने का मन ... आगे पढ़ें...
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 मेरी जादू की पुड़िया,अवि, तुम्हारा नाम "जादू" की पुड़िया रखते समय सोचा भी नहीं था कि तुम सचमुच में मेरे "जादू" की पुड़िया हो जाओगी| मैं तो माँ हूँ मेरा इस पीड़ा से गुजरना लाज़मी है, लेकिन पता है मेरी पीड़ा का ताप तुम्हारे "जादू" के शरीर तक पहुंच गया है| 4 ... आगे पढ़ें...
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हृदय छोटा हो तो शोक वहां नहीं समायेगाऔर दर्द दस्तक दिए बिनादरवाजे से लौट जाएगाटीस उसे उठती हैजिसका भाग्य खुलता हैवेदना गोद में उठा करसबको निहाल नहीं करती जिसका पुण्य प्रबल होता है वही अपने आंसुओं से धुलता हैअसल में हम कवि नहींशोक की संतान हैंहम गीत नहीं ... आगे पढ़ें...
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 -"जीवन के चमत्कारों से तो मैं यूं भी अभिभूत हो रही थी| ऊपर से उन पर मोहर लगाने के लिए जब कुछ ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं कि अस्तित्व के समक्ष अहोभाव से भर जाती हूँ..... शब्द खो जाते हैं ........ समय विलुप्त होने लगता है.... मेरा मैं खोने लगता है और जीवन के ... आगे पढ़ें...चैनल: प्रेम, प्रतीक्षा, प्रणय और परमात्मा..., तीसरी दुनिया, अमृता और ओशो, पत्र नायिका के नाम , बातें कुछ अनकही सी, अधूरी कहानियाँ, मेरी पसंद, जीवन के रंगमंच ..., मेरा कोना, मेरी दुनिया, सपनों की दुनिया, दो दुनिया
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 कई बार क़लम उठती नहींसफेद चादर पर लोट लगाती हैअलसाती है यूं मानो रात भर की जागी हुई होजैसे रात भर सोने न दिया हो उसेबहुत से काम अब भी बाकी हैंसुबह उठना तो होगाऔर पूरे करने होंगे कुछ ज़रूरी काम वैसे भी बहुत कुछ हैजो सिर्फ़ कलम के बस का हैजैसे दिन को रातऔर ... आगे पढ़ें...
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 कई हजार चाबियाँ मेरे पास थीं और एक-एक चाबी एक-एक दरवाज़े को खोल देती थीं दरवाज़े के अंदर किसी के सोने का कमरा भी और घरवालों के दुख जो उनके ही होते थे, पर किसी समय मेरे भी होते थे मेरी छाती की पीड़ा की तरह पीड़ा, जो दिन के समय जागूँ, तो जाग पड़ती थी, पर फिर भी ... आगे पढ़ें...
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"मै एक इंसान हूं, मेरी भी कोई इच्छा- अनइच्छा है| यह बात मैं किसी को कैसे समझाऊं| पिताजी के अनुसार मैं अकेली रह कर खराब हुई जा रही थी| लोग बड़ी आसानी से स्त्रियों को खराब की उपाधि दे देते हैं| खराब होना किसे कहा जाता है? पुरुष के साथ संपर्क होने से ... आगे पढ़ें...
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 बच्ची का आना जैसे -बेमौसम बादलों के पीछे सेसूरज का दिनों बाद निकलनामुस्कुरानाछा जानाआपके कपड़ों के बीच पोतड़ों का टंग जानाबच्ची का आना जैसे -दादा के आँखों सेमोतियाबिंद की छानी का कट जानाउनका काँपते हाथों से अपनी गोद मेंबच्चे के पूरे शरीर को मज़बूती से समो ... आगे पढ़ें...
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