तुमने सिर्फ़ मुझे नहीं तुमने चूमा मेरे स्पंदित तार-मंद्र जीवन को सुदूर बचपन को सभी प्रेमों को प्राचीन जन्मकथा को विस्मृत जन्मांतरों को... अंतःसलिल दुखों और सुकुमार सुखों को तुमने छुआ सिर्फ़ मेरे होंठों या हाथों भर को नहीं तुमने छुआ मेरे जन्म की अंधेरी कंदरा में अकस्मात छा गई प्रभा को कविताओं में भटकते आदिशब्द की व्यथा को... तुमने सिर्फ़ तुमने तुम्हीं ने......... - अशोक वाजपेयी http://naayika.mywebdunia.com/
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| अंतिम बार संशोधित | 18 सितंबर, 2009 12:58:37 PM IST |