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वर्जित बाग़ की गाथा -1

वफ़ा तो अंतर्मन के खिल जाने की महक का नाम होता है, लेकिन दुनियावालों ने इसे इतने छोटे अर्थों वाला बना दिया कि यह सिर्फ फ़तवों के लिए रह गया|

सुख बस्ती हिप्पोक्रेसी का माथा सिर्फ तेवरों से वाक़िफ़ होता है, माथे की कोई लौ उसका नसीब नहीं बनती.......

कटु ज़बाने नहीं जानती कि मुहब्बत के मधु में भीगी जबान कैसे अंतर्रस बनती है....

यही अंतर्रस वर्जित को अवर्जित बनाता है और दुनियावी क़ानून को ख़ुदाई क़ानून बनाता है|

अदन बाग़ के वर्जित फल को खाने वाली ख़ुदाई क़शिश आदम और हव्वा को विरासत में मिली है|

क़शिश का क्या, वह भी अंतर्चेतना की तरह सोई रहती है लेकिन जिनके सपनों ने उसे जगा लिया और जिन्होंने हवाओं में बजता हुआ इकतारा सुन लिया और जिन्होंने कोई धड़कता पल जी लिया खुदा उनकी इलाही रमज़ को वासनामय आंखों से बचाए|


- अमृता प्रीतम ("वर्जित बाग़ की गाथा" की भूमिका से)




अपनी पुस्तक 'वर्जित बाग की गाथा' की भूमिका में एमी ने 'वर्जित बाग़ की गाथा को ले कर कुछ हर्फ़' लिखा है, ये उसी का हिस्सा है| इस पुस्तक को मैं ख़ुदा की किताब कहती हूँ| इस पुस्तक का एक एक हर्फ़ मेरे लिए किसी आयत से कम नहीं| इसमें एमी ने उन तमाम लेखकों, आशिक़ों और दरवेशों के अनुभवों को उनकी ही कलम से संकलित किया है जिन्हें अपने जीवन में कभी न कभी, कहीं न कहीं ख़ुदा का दीदार हुआ है|

हालांकि हम दोनों को रोज़ ही ख़ुदा का दीदार होता है, कभी एक दूसरे की बातों में, कभी एक दूसरे की आँखों में, एक साथ खाते हुए, एक साथ उठते बैठते चलते हुए| लेकिन जब विनय ने मुझे 'वर्जित बाग़ की गाथा को लेकर कुछ हर्फ़' सुनाना शुरु किया तो लगा शायद ये कुछ हर्फ़ ही है सिर्फ़, जो हमारे दिलों की क़शिश को समझ सकते हैं| लगा शायद बात यहीं तक रुक जाए लेकिन विनय ने आगे पढ़ना जारी रखा| इस पुस्तक में सबसे पहले 'सुधांशु' द्वारा लिखित छठा तत्व है......


काया विज्ञान कहता है यह काया पंचतत्वों से मिलाकर बनी है- पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि और आकाश| लेकिन इन पाँचों तत्वों में इतना गहन आकर्षण क्यों है कि इन्हें मिलना पड़ा???

.........क्रमशः

प्रतिक्रियाएँ

Re: वर्जित बाग़ की गाथा -1
आप उत्सुकता बनाए रखना जानती हैं. मैंने पढ़ी है अमृता की ये पुस्तक इसलिए और भी अधीर हूँ इस क्रमश: से आगे जानने के लिए कि आपके जीवन में हुआ क्या
Re: वर्जित बाग़ की गाथा -1
यदि आपने वर्जित बाग़ की गाथा पढ़ी है तो आपको पता ही होगा कि उसमें आशिकों और दरवेशों की सच्ची प्रेम कहानी और पुनर्जन्म की घटनाओं का जिक्र है| जाहिर है मेरे जीवन में भी आपको प्रेम और पुनर्जन्म की एक सच्ची दास्तान ही मिलेगी| लेकिन उसकी हक़ीक़त आपको तभी दिखाई देगी जब आपमें अस्तित्व के चमत्कारों को स्वीकार करने का साहस और शक्ति हो|
Re: वर्जित बाग़ की गाथा -1
Aapke blog par pehli baar comment de rahaa hoon......Naam bataane ki poori himmamt hai lekin bataaungaa nahi....mujhe yaqeen hai ki mere likhne ke andaaz se aapko pataa chal hi jaayegaa ki mai kaun hoon lekin aap ise zaahir na karein. Khair......Jo faislaa aapne kiyaa uske virodh me pooraa zamanaa hai hai aur paksh me sirf aapka bhavishya.....kya sahi hua kya galat hua ...isse zyadaa is baat ka mahatv hai ki ye sab kyon hua? Aapki agli raahein aasaan hon, aisi meri kamnaa hai.........
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