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अक्टूबर 2008


ब्लॉग्स (1)
(1)तुम सब जानते हो इंतज़ार की कितनी सीढ़ियाँ मैं चढ़ती रही उस चाँद को छूने के लिए जो रोज़ रात को मेरे घर की छत पर उग आता थाऔर मैं सबसे नज़रें चुराकरस्वप्न मित्रों की मदद से तुम्हारी छत पर कूदने का प्रयास करती थी। तुम्हें हौले से पुकारती थी कि आओ चलो उस ... आगे पढ़ें...