
मैं तुम हो जाऊँ तुम चाहो तो उग आऊँ कहीं आँगन में तुम्हारेया चाँद बनकर खड़ा रहूँ दरवाजे पर तुम्हारेचाहो तो नदी हो जाऊँ बहूँ तुम्हारे अंदर कहींहर लूँ परेशानीऔर दुख तुम्हारेहवा हो जाऊँ उड़ाऊँ आँचल तुम्हाराया धूप जिसमेंबच्चे खेलें तुम्हारेक्यों न ...
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