
वैसे तो वह अकसर लोगों को हाथ मिलाकर हेलो करती है। लेकिन पता नहीं क्यों आज उसने जिस जिस से हाथ मिलाया, वे कुछ पल के लिए अपना हाथ टटोलने लगे। एक ने तो कह भी दिया ऐसा लग रहा है, हाथ से कुछ चुराकर ले जा रही हो। उसने भी यूँ ही मस्ती में कह दिया “हाँ आपकी किस्मत”
फिर आकर मुझसे पूछने लगी लोगों को यूँ क्यों लग रहा है कि मैं उनसे हाथ मिलाकर उनकी किस्मत चुराती हूँ?
मैंने भी कह दिया सच तो है।
वो आश्चर्य और नाराज़गी से मेरा चेहरा देखने लगी, जैसे सच में उसने कोई चोरी की हो और पकड़ी गई हो।
मैंने कहा- सच ही तो है तुम लोगों से हाथ मिलाकर उनके हाथों से उनकी बुरी किस्मत चुराकर उन्हें खुशकिस्मत कर देती हो।
उसके चेहरे पर अजीब-सी चमक थी जिसका राज़ तब खुला जब उसने मुझसे पूछा- हाथ तो मैं आपसे भी मिलाती हूँ, यानि आपकी बदकिस्मती भी मेरे नाम?
उसकी शातीर जवाबी ने मेरे चेहरे पर इत्मिनान की मुस्कुराहट दे दी, इसलिए मैंने बड़े इत्मिनान से कहा- नहीं, मुझसे हाथ मिलाती हो तो वो सारी चुराई हुई बदकिस्मती मेरे पास आ जाती है, जो मेरी उस खुशकिस्मती में घुलकर लुप्त हो जाती है, जो तुमने मेरे जीवन में आकर दी है।

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