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10 जून, 2008


ब्लॉग्स (1)
सहरा की गर्म मिजाजी से परेशान एक रात लड़ती रही रातभरसुकून की ठंडी चादर का कोना थामे एक रात सिसकती रही रातभर चाँद खामोश-सा देखता रहा बादल के झरोखों सेतारों की मस्ती चलती रही रातभर शिकायतों की रेत थी जो आँखों में उड़ती रही वो दामन से सितारे झटकती रही ... आगे पढ़ें...