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सुंदरता का सपना


बहुत अजीब सा ख्वाब था वो, कहीं दूर पहाड़ों पर, सफेद फूलों के बीच सुंदरता मुस्कुरा रही थी, सूरत में ताज़गी और सीरत में पवित्रता की लौ झिलमिला रही थी। मैं ज्यों-ज्यों उसकी तरफ बढ़ती वो हँसते हुए मुझसे दूर भाग रही थी। जब तक मेरे और सुंदरता के बीच में दूरी थी उपर आसमान से देवता फूल बरसा रहे थे।

उस सुंदरता को खुद में डालने के लिए मैंने जैसे ही उसे हाथ लगाया, मेरे शरीर का आधा हिस्सा जल गया। खुद का इतना भयानक रूप कभी नहीं देखा। लेकिन मेरा आधा हिस्सा अब भी सही सलामत था, उस आधे हिस्से में मैंने उसकी पवित्रता की लौ को खुद में झिलमिलाते हुए देखा।

मेरी दैहिक सुंदरता को पाने की इच्छा ने शायद मुझे जलाकर राख कर दिया था, लेकिन उसके सीरत की सुंदरता ने मेरे आधे हिस्से को हमेशा के लिए रोशन कर दिया।

उस उपरवाले की मैं हमेशा एहसानमंद रहूँगी, जिसने मुझे एक सपने के रूप में ही सही तन और मन की सुंदरता के बीच का अंतर समझाया।

प्रतिक्रियाएँ

Re: सुंदरता का सपना
सुंदर और मार्मिक
Re: सुंदरता का सपना
लेख अच्छा लगा। आप बहुत अच्छा लिखती हैं।
Re: सुंदरता का सपना
ुacha likha hai
Re: सुंदरता का सपना
उस उपरवाले की मैं हमेशा एहसानमंद रहूँगी, जिसने मुझे एक सपने के रूप में ही सही तन और मन की सुंदरता के बीच का अंतर समझाया। कमाल की रचना। सदा सत्य बात।सुंदरतम।
अस्वीकरण