लोड हो रहा है...
मैंने तुम्हें पाया ऐसेजैसे रात ने ख्वाब को सुबह होने से पहले हीचाँद को लौटा दिया हो मैंने तुम्हें पाया ऐसे जैसे कल रात चाँद के घर से सूरज तुम्हें ले आया होऔर मैं सुबह खिड़की खोलना भूल गया