लोड हो रहा है...
दो दुनिया के बीच की बैचेनी को सुकून तक पहुँचाने वालेहर उस लफ्ज़ की मैं कर्ज़दार हूँ जो तुम्हारे लबों से शिकायत बनकर निकले......