Nitin द्वारा 7 जून, 2008 9:08:53 AM IST पर टिप्पणी
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अगर शब्दों से संवादो के पुल टूट जये तो ये समझना
चाहीये, या तो कभी संवादो के पुल पर ही नही रहे हो| या संवादो का पुल ठीक से बना ही ना हो| अगर किसी के साथ इतने गेहरे संवादो के पुल बने हो की "नीचे खामोशी की नदी बह रही थी" तो जरूर आप गलती मे हो| वो कोई भी हो अगर पुल बना होगा तो वो आपको पुल पर ही इंतज़ार करता मिलेगा| वैसे आप इतनी sentimental lines किस के लिये लिख रहे हो|
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