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संवादों के पुल पर




संवादों के पुल पर खड़े थे हम दोनों
और नीचे खामोशी की नदी बह रही थी

न जाने कौन-सा शब्द बहुत भारी हो गया
कि जब चलने को हुए तो पुल टूट गया....




चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी




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प्रतिक्रियाएँ

Re: संवादों के पुल पर
न जाने कौन-सा शब्द बहुत भारी हो गया कि जब चलने को हुए तो पुल टूट गया.... क्या बात है, गहरा कथ्य... *** राजीव रंजन प्रसाद
Re: संवादों के पुल पर
अगर शब्दों से संवादो के पुल टूट जये तो ये समझना चाहीये, या तो कभी संवादो के पुल पर ही नही रहे हो| या संवादो का पुल ठीक से बना ही ना हो| अगर किसी के साथ इतने गेहरे संवादो के पुल बने हो की "नीचे खामोशी की नदी बह रही थी" तो जरूर आप गलती मे हो| वो कोई भी हो अगर पुल बना होगा तो वो आपको पुल पर ही इंतज़ार करता मिलेगा| वैसे आप इतनी sentimental lines किस के लिये लिख रहे हो|
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