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1 मई, 2008


ब्लॉग्स (1)
संवादों के पुल पर खड़े थे हम दोनों और नीचे खामोशी की नदी बह रही थी न जाने कौन-सा शब्द बहुत भारी हो गया कि जब चलने को हुए तो पुल टूट गया.... आगे पढ़ें...