कल तुमने मुझे उस वक्त छुआ था जब मैं याद कर रही थी वो दिन जब स्पर्श भटक जाया करते थे राह से और मेरी रूह तक लौटने से पहले ही दम तोड़ देते थेतभी तो तुम्हें वो काँटों की तरह चुभे थेऔर मैंने आँखों को मुस्कुराहट से ढँक दिया थाताकि तुम उस लहू को न देख पाओ जिसके ...
और पढ़ें...