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24 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
बर्फ से ढँकी वादियाँ मैं और तुममैं मैं ही थी तुम तुम ही थे लेकिन चेहरा एक ही था .... मैं बात करूँ तो मेरा चेहरा, तुम बातो करो तो तुम्हारा............... आगे पढ़ें...

भावनाएँ मंदिर में जलती अगरबत्ती की तरह होती हैं, जो खुद जलकर दूसरों को खुशबू देती हैं। और ये भावनाएँ हरेक के अंदर होती हैं बस फर्क इतना है कि कोई जलता हुआ दिख जाता है तो कोई अपनी आग अंदर ही छुपा लेता है। कौन जलता है और कौन छुपाता है? जो अपनी भावना व्यक्त ... आगे पढ़ें...