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12 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
जीवन की ऊहापोह में प्रेम, जैसे भीड़ में माँ के हाथ से बच्चे की ऊँगली छूट जाती हैसबसे व्यस्त दिन में उदासी, बेझिझक घर में घुस आती बेखौफ हवाएँ जो थमने के बाद पैरों में मिट्टी छोड़ जाती हैमन की बैचेनी में यादों का दखलघर के आँगन के पुराने दरख्त परबिना पूछे ... और पढ़ें...

उसकी खामोशी में भी एक चीख सुनाई दे रही थीकाजल भी उसकी आँखों से झाँकती परेशानियाँ नहीं छुपा पायासबकुछ होने पर भी किसी के जाने का अनजाना खौफ़न जाने क्‍या चाहता है उसका छोटा-सा दिलकिसी ने मुझे यह चार पंक्तियाँ लिखकर दी, और कहा जिसे देखकर यह लिखी है, उसके मन ... और पढ़ें...