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शांत सरिता?



ये जो मेरी आँखों से बह रही है
वो मेरी दिवानगी नहीं
तुम ने जिस उफान को रोक रखा है
उसकी दरार से रिसता हुआ पानी है

प्रतिक्रियाएँ

प्यार भरी टिप्पणी
अक्ल कहती है न जा कूचा -ऐ -कातिल की तरफ़ । सरफरोशी की हवश कहती है , चल क्या होगा । ।
अस्वीकरण