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अप्रैल 2008
१.मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझेआज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंनेरात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे२.सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खा़ली कासा(भिक्षापात्र)रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमेंसूदखो़र सूरज कल मुझसे ये भी ले ... और पढ़ें...
एक बार फिर मैं लौट आई हूँ देह समेत, और रूह का एक कोना फाड़ करइश्क के दरख़्त पर बाँध दिया है, मन्नत पूरी होने के इंतज़ार में..... और पढ़ें...