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अप्रैल 2008

 

• धरती सागर और सीपियाँ

अमृता प्रीतम के उपन्यास “धरती सागर और सीपियाँ” से

ताकत, जब इंसान अपने भीतर से पाता है, तो उसे इस तरह प्यार करता है जैसे कोई अपनी महबूबा को प्यार करता है। पर जब अपने भीतर से पाने की जगह दुनिया से पाता है, तो उसे इस तरह प्यार करता है जैसे कोई किसी वेश्या को प्यार करता है। कोई रिश्ता शरीर पर पहने हुए कपड़े ...   और पढ़ें...
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• मैं प्रेम की दीवानी हूँ

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• समपूरन सिंह गुलज़ार

मेरी पसंद

१.मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझेआज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंनेरात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे२.सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खा़ली कासा(भिक्षापात्र)रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमेंसूदखो़र सूरज कल मुझसे ये भी ले ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरी पसंद
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• अतीत

कल तुमने मुझे उस वक्त छुआ था जब मैं याद कर रही थी वो दिन जब स्पर्श भटक जाया करते थे राह से और मेरी रूह तक लौटने से पहले ही दम तोड़ देते थेतभी तो तुम्हें वो काँटों की तरह चुभे थेऔर मैंने आँखों को मुस्कुराहट से ढँक दिया थाताकि तुम उस लहू को न देख पाओ जिसके ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• मैं और मेरा ब्लॉग

मेरे ऑफिस में मैं जिस खिड़की के पास बैठती हूँ, शाम को ढलते सूरज की गर्मी से मेरा बाँया हिस्सा उस गर्मी में तप जाता है और दाएँ हिस्से से आती ए सी की ठंडक से दाँया हिस्सा पूरी तरह से ठंडा हो जाता है। तापमान के इस अंतर को एक साथ अनुभव करना बिलकुल उसी तरह है, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• विचारों की भीड़

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• Only For Ladies….

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श्रेणियाँ: मेरा कोना
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• कल रात का सपना

बर्फ से ढँकी वादियाँ मैं और तुममैं मैं ही थी तुम तुम ही थे लेकिन चेहरा एक ही था .... मैं बात करूँ तो मेरा चेहरा, तुम बातो करो तो तुम्हारा...............   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: सपनों की दुनिया
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• खाली मंदिर......

एक और संवाद

भावनाएँ मंदिर में जलती अगरबत्ती की तरह होती हैं, जो खुद जलकर दूसरों को खुशबू देती हैं। और ये भावनाएँ हरेक के अंदर होती हैं बस फर्क इतना है कि कोई जलता हुआ दिख जाता है तो कोई अपनी आग अंदर ही छुपा लेता है। कौन जलता है और कौन छुपाता है? जो अपनी भावना व्यक्त ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: सपनों की दुनिया
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• हौसलों के पंख पर

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श्रेणियाँ: जीवन के रंगमंच ...
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• खोज या आविष्कार

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श्रेणियाँ: जीवन के रंगमंच ...
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• Shake Hand

रात एक ख्वाब देखा कि मैं जो कुछ भी छू रही हूँ सब पिघल रहा है..........दिन भर के किस्सों को याद करती रही ताकि उस सपने का कारण खोज सकूँ....फिर याद आया सुबह तुमसे हाथ मिलाया था..............   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: सपनों की दुनिया
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• बात निकली है तो दूर तलक जाएगी...

जीवन के रंगमंच से...

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श्रेणियाँ: जीवन के रंगमंच ...
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• मन्नत

एक बार फिर मैं लौट आई हूँ देह समेत, और रूह का एक कोना फाड़ करइश्क के दरख़्त पर बाँध दिया है, मन्नत पूरी होने के इंतज़ार में.....   और पढ़ें...
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• मैं प्रेम की दीवानी हूँ

क्या आपने खुशी को छूकर देखा है? नहीं ना? उसका कोई रूप नहीं होता। आप जब खुश होना चाहते हैं, तो उसे किसी भी रूप में ढालकर खुश हो जाते हैं। ये आपके अंदर की तरंगे हैं, जो जब दिल से निकलती हैं तो चेहरा भी रोशन हो जाता है। वर्चुअल हैप्पिनेस कभी देखी नहीं, अचानक ...   और पढ़ें...
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• ट्राफिक जाम

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श्रेणियाँ: जीवन के रंगमंच ...
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• शाम होते होते

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श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• जीवन की ऊहापोह

जीवन की ऊहापोह में प्रेम, जैसे भीड़ में माँ के हाथ से बच्चे की ऊँगली छूट जाती हैसबसे व्यस्त दिन में उदासी, बेझिझक घर में घुस आती बेखौफ हवाएँ जो थमने के बाद पैरों में मिट्टी छोड़ जाती हैमन की बैचेनी में यादों का दखलघर के आँगन के पुराने दरख्त परबिना पूछे ...   और पढ़ें...
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• उसकी खामोशी

उसकी खामोशी में भी एक चीख सुनाई दे रही थीकाजल भी उसकी आँखों से झाँकती परेशानियाँ नहीं छुपा पायासबकुछ होने पर भी किसी के जाने का अनजाना खौफ़न जाने क्‍या चाहता है उसका छोटा-सा दिलकिसी ने मुझे यह चार पंक्तियाँ लिखकर दी, और कहा जिसे देखकर यह लिखी है, उसके मन ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: तीसरी दुनिया
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• Last Frustration

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श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• ऑफिस की पार्किंग पर...

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श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• आखिरी अलविदा

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श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• चाँद का अचार

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• नाराजगी को संवाद दो

जीवन के रंगमंच से...

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• सी-सॉ

जीवन के रंगमंच से

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• The Extreme

I saw her at extreme Of love And hatred tooWhen she lovesThe Sun rises And melts in her warmthDay becomes goldenAnd night falls in armsWhen she hatesThe Sun denies risingMoon denies shiningBefore anybody can call the LoveEarth dissolves   और पढ़ें...
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• प्रेम तराजू

तुमने एक ही पलड़े में रख दियासमय को, बातों को, शिकायतों को और दूसरे पलड़े में डालती रही प्रेम टुकड़ों-टुकड़ों मेंऔर कहती रही देखो तुम्हारे प्रेम का पलड़ा हलका हो चुका है। मैं अपनी खामोशियों को लेकर खड़ा रहा यह सोचकर कि इसे किस पलड़े में डालूँ एक और वो बातें हैं ...   और पढ़ें...
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• नगीना और अस्मिता

जीवन के रंगमंच से...

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• शांत सरिता?

ये जो मेरी आँखों से बह रही हैवो मेरी दिवानगी नहींतुम ने जिस उफान को रोक रखा हैउसकी दरार से रिसता हुआ पानी है   और पढ़ें...
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• जीवन का नृत्य

जीवन के रंगमंच से...

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