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29 मार्च, 2008

 

• अमृता-इमरोज़ के प्रेम पत्र से.....

किसी तारीख़ को

अपनी एक दोस्त के लिए एक किताब खरीदने गई थी। चाहे जितनी किताबे छान लूँ, नज़रे दो ही जगह होती है या तो ओशो या अमृता प्रीतम। कई दोस्त टोक चुके हैं- दुनिया में और भी बहुत कुछ है पढ़ने के लिए, अब निकलो इन दोनों से। मैं बस कह देती हूँ- खुद से निकल कर कहाँ ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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