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24 मार्च, 2008

 

• स्पर्श

वो उष्मा थी या ऊर्जा नहीं जानता बस एक स्पर्श से मैंने ख़्वाहिशों को जलते देखा है एक आग जो राख नहीं करती मैंने दिल के पत्थर को कुंदन में बदलते देखा हैवो हँसती है तो सूखी नदी भी उन्मादित होकर बह उठती हैवो उदास थी........ मैंने समन्दर को सिकुड़ते देखा हैवो छू ...   और पढ़ें...
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• खालीपन

जब पुकार घर की दीवारों से टकराकर लौट आएजब दोस्त कही हुई बात भूल जाएजब मंदिर की घंटियाँ शोर मचाएऔर टीवी के सामने बच्चे खामोश हो जाए..... जब मन की हलचल शब्दों में उलझ जाए, जब विचारों का धागा टूट जाए जब अपनी कही बात भी समझ न आएऔर सड़के कार और बसों के नीचे दब ...   और पढ़ें...
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• मुझे पूरा करने के लिए.....

मुझे पूरा करने के लिए.....एक बार मुझ पर अपनी परछाई पड़ जाने दोएक जो खाली-सा एहसास है उसे भर जाने दोजिसका धुँआ भी खोजता है ठीकानामुझे उस धुप बत्ती की तरह जल जाने दो उँगलियों की सरसराहटख़्वाहिशों का बहक जाना, देह की सुगंध का आत्मा को छू जाना तेरे नाम से जुड़ना ...   और पढ़ें...
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