जब पुकार घर की दीवारों से टकराकर लौट आएजब दोस्त कही हुई बात भूल जाएजब मंदिर की घंटियाँ शोर मचाएऔर टीवी के सामने बच्चे खामोश हो जाए..... जब मन की हलचल शब्दों में उलझ जाए, जब विचारों का धागा टूट जाए जब अपनी कही बात भी समझ न आएऔर सड़के कार और बसों के नीचे दब ...
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