Harmeet द्वारा 17 मार्च, 2008 11:54:28 AM IST पर टिप्पणी
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परिवार को देने के लिए संडे के सिवा कोई डे नहीं है आज किसी के पास भले ही परिवार कितना भी जरूरी हो. आप दो दिन आफिस ना जाओ परिवार के साथ रहो. तीसरे दिन काम और कटती सैलरी अपने आप आफिस ले आएगी बोले तो पैसा.
पैसा :- हीअर आई गो, दिस इस माई टोपिक तो आइ कैन राईट ईवन आई कैन फलड दि प्रतिसाद......... इंसान का इस दुनिया में आना सिर्फ पैसे के कारन हुआ है. भगवान से जब पैसा संभाला नहीं गया तों इंसान को भेजा खर्च करने को. मेरे हिसाब से तो मनी इज ऐवरीथिंग, प्यार, परिवार, दोसत सभी खुश
बीकास आफ मनी.
दोस्त : आई लव माई फ्रैंडस बहुत अच्छे हैं.
प्यार : प्लीज हंसी के मारे जान निकल रही है.................
Puja Sen द्वारा 9 अप्रैल, 2008 3:00:53 PM IST पर टिप्पणी
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यही सवाल तो मुझे कब्से परेशान करे हुये है, की मेरे जीवन मे क्या हे जो सब्से महत्व्पूर्न हे.प्यार जो अब परिवार बन गया हे या अपनी अलग पेह्चन बनाने का सपना. खुद से क्या चाह्ती हूँ यही नही जान्ती.आज तक वही किया जो दिल ने चाहा फिर भी क्यो हे ये उल्झन .
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