कुछ संकेत खुदा की तरफ से थे कुछ रूह को छूती हुई आवाज़ें थी कुछ खलाओं से टकराकर लौट आई पुकारें कुछ मन को भेदती हुई तलबऐसे ही पलों में तुझे देखाइश्क में सराबोर मैं उलझा हुआ हूँ मन के भीतर से निकलते दोराहे में, जो एक तुझ तक जाता है दूजा उस खुदा तक.....जानते ...
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