आज सूरज ने कुछ घबरा कररोशनी की एक खिड़की खोलीबादल की एक खिड़की बंद कीऔर अंधेरे की सीढियाँ उतर गया….आसमान की भवों परजाने क्यों पसीना आ गयासितारों के बटन खोल करउसने चाँद का कुर्ता उतार दिया….मैं दिल के एक कोने में बैठी हूँतुम्हारी याद इस तरह आयीजैसे गीली लकड़ी ...
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