shaifaly Sharma द्वारा 5 मार्च, 2008 6:18:00 PM IST पर पोस्टेड
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मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थीसिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जानेक्या ख्याल आयाउसने तूफान की एक पोटली सी बांधीमेरे हाथों में थमाईऔर हंस कर कुछ दूर हो गया हैरान थी….पर उसका चमत्कार ले लियापता था कि इस प्रकार की घटनाकभी सदियों में ... और पढ़ें...
shaifaly Sharma द्वारा 5 मार्च, 2008 5:08:00 PM IST पर पोस्टेड
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उसकी बाँहों से फिसलकर कोई ख्वाब लबों पर उलझ गया मैं रूह से कसक उठने का इंतज़ार करती रही वो सजदे में कह गयाकोई एक ख्वाब जो पूरा न हुआ हो कभीमुझसे कहना, मैं अपनी हक़ीकत लूटा दूँगा…………… और पढ़ें...