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4 मार्च, 2008

 

• प्रेम, प्रतीक्षा, प्रणय और परमात्मा

मेरे दोस्तों से तुम्हें कोई शिकायत नहीं? अब नहीं पहले तो हुआ करती थी हाँ जब तुम सिर्फ दोस्त थीऔर अब?कुछ भी नहीं मतलब, तुम्हें मुझसे प्यार नहीं हुआ करता था, अब नहीं और जो शादी का वादा? वो हम करेंगे जब तुम्हें प्यार नहीं तो शादी क्यों करोगे क्योंकि अब मैं ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• सिर्फ एक औरत

तुम सच की धरातल पर खड़े किसी महात्मा की मूरत की तरह जिसको लोग नमस्कार कर आगे बढ जाते हैं एक और झूठ बोलने के लिए, मैं कल्पना के आसमान में उड़ती अदनी-सी चिड़िया। तुम सच के विकृत रूप को नीडरता से स्वीकार करने वाले रोशनी से भरपूर दिन मैं सपने के सच हो जाने के डर ...   और पढ़ें...
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