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3 मार्च, 2008

 

• संवाद जो बाकी है....

उसकी बातों ने दिल में सवालों का जंगल खड़ा कर दिया था, रातभर उस जंगल में जवाबों के लिए रास्ता तलाशती रही। उसे कभी देखा नहीं लेकिन फिर भी उसकी मासूमियत मेरे ज़हन में चेहरा ढूँढती रही। जब तक उससे नेट पर बात करती रही उसे मैं एक बड़ी उम्र की महिला समझती रही, जो ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: तीसरी दुनिया
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