
उसकी वो बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ
उन लड़ाइयों के पीछे छोटे-छोटे कारण
मेरा उसको समझाना
और उसका झट से मान जाना.......
रिश्ता अपेक्षाओं से उपर उठ चुका था
लेकिन उपेक्षा से नहीं...............
बहुत दिन गुजरे प्रेम की पनाहों में
सुकून को परिभाषा मिल गई ....
खामोशी को ठीकाना.........
इन सबके बीच उसका
अचानक से एक सवाल
हमारे बीच कुछ है जो अब नहीं है
जिसके बिना कुछ अधूरा-सा है....क्या है वो?
मैंने झट से कहा- लड़ाई।

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