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1 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
हँस लेता हूँ खुद परजब कभी आज़ाद होने का खयाल आता है मैं घर छोड़ कर कई बार निकल जाता हूँक्योंकि मैं आज़ाद होना चाहता हूँ ज़िम्मेदारियों से मैं शहर छोड़कर चला जाता हूँ अकसर क्योंकि मैं आज़ाद होना चाहता हूँ रोजी रोटी के झँझटों से मैं देश छोड़ कर चला जाता हूँ कभी ... आगे पढ़ें...