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25 जनवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
ये बड़ा-सा टाइटल तो दे दिया, लेकिन सच मेरे पास कहने को कुछ नहीं। मुझे नहीं आता गड़े मुर्दे उखाड़ना, बारह साल पहले हुए किसी हत्या का पोस्टमार्टम करना। फिर उसके गुनाहगार की मनःस्थिति पर विचार करना। सही-गलत के तराजू पर रखकर कानून की धज्जियाँ उड़ाना। मुझे नहीं ... आगे पढ़ें...