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12 जनवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
उसके हाथ में उठ आए फफोलों से रिसते पानी का मेरी आँखों से बहते आँसुओं से कोई मुकाबला नहीं था। शायद इसीलिए तीन दिन से बहती मेरी आँखें एकदम से सूख गई थी। तीन दिन से जीवन की ऊहापोह में फँसे शब्द उसको देखकर गले में अटक-से गए थे। उसे कुछ कहना रिश्ते को छोटा ... आगे पढ़ें...