
जिस चीज पर पूरी दुनिया की नज़र हो, वह हम कलम के कारीगरों से वंचित रह जाए? हो ही नहीं सकता। 10 जनवरी 2008, गुरूवार, टाटा, नैनो और मैं। ऐसा लग रहा था जैसे टाटा ने यह गाड़ी सिर्फ मेरे लिए लाँच की है। यह मैं सिर्फ मैं नहीं हूँ, यह मैं हमारे पड़ोस के वर्माजी है, ...
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