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ले चलो............


ले चलो............
एक ऐसी जगह
जहाँ मुझे दिखाई न दे
भूख के पैबंद वाला मखमली जिस्म,
ले चलो.............

एक ऐसी जगह
जहाँ सच कड़वा न हो,
झूठ की मिठास से न आती हो उबकाई
ले चलो..........

एक ऐसी जगह जहाँ ख़्वाब महकते हो
लेकिन हक़ीकत से न आती हो दुर्गंध
ले चलो...............

एक ऐसी जगह
जहाँ बचपन कभी बड़ा न हो
और यौवन कभी न मुरझाए
ले चलो......................

एक ऐसी जगह
जहाँ प्रेम की बगिया चाहे न हो
लेकिन नफरत की एक कली भी न खिलने पाए
ले चलो.......................


एक ऐसी जगह
जहाँ मेरे मैं का विस्तार
हमारे हम में सीमट जाए
ले चलो........

प्रतिक्रियाएँ

Re: ले चलो............
आप हमे ले गयि उस जहाँ मे जिस जहाँ कि तलाश हर युग मे हर प्राणी को रहि हे.चंद लब्जो मे जीवन का सार लिखा हे. बस और क्या लिखे,आपकि सोच को सलाम
Re: ले चलो............
प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई। सिर्फ प्रेम ही होगा अंत में हमारे साथ। और प्रेम कोई बहुत पवित्र काल्पनिक वस्तु नहीं है। किसी प्रेमी-प्रेमिका का प्रेम और किसी का अपने काम से प्रेम दोनों एक जैसी चीज है। दोनों का आस्वाद अलग हो सकता है, लेकिन अनुभूति एक जैसी होती है।
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