एक दिन यूँ ही दिनभर की परेशानियों से परेशान होकर रात को टीवी देखने लगी। अचानक शाहरुख खान आता है और कहता है- 'Don't be Santusht… Wish Karo, Dish Karo' मैं खुश...Of course शाहरुख को देखकर, लेकिन उससे ज्यादा डिश टीवी के उस स्लोगन से .......... थोड़ा और विश करो।
ख़याल आया......कितनी छोटी-सी बात है, लेकिन इतनी गहराई लिए हुए है...वाह मैं खुश क्या बढ़िया आइडिया आया है। जीवन को mediocre thinking से निकालकर थोड़ा-सा और विश करने का। कुछ original नहीं लिख पा रही थी सोचा नेट में सर्च मारकर देखा जाए शायद कुछ चोरी करने लायक मिल जाए। वैसे मुझे उम्मीद कम थी, लेकिन जैसा कि हमेशा होता है उम्मीद से ज्यादा ही मिला। उस एक स्लोगन पर बहुत से लोगों ने बहुत कुछ लिखा था।
खैर, आइडिया unique न होने का ग़म कम था, और इस बात की खुशी ज्यादा थी कि लोग सच में इस बात में विश्वास रखते हैं कि जीवन में “चलता है यार” या “क्या किया जा सकता है” से उपर उठकर थोड़ा और विश किया जाए, तो बहुत कुछ मिल सकता है।
हमारे आसपास की दुनिया से संतुष्ट होकर हम जब भी बैठ जाते हैं, तो जीवन में एक ठहराव-सा आ जाता है, लेकिन LESS से संतुष्ट न होकर जब हम BEST के लिए विश करते हैं, तो हम उन सीढ़ियों पर चढ़ रहे होते हैं, जिसे सफलता की सीढ़ी कहते हैं।
तभी तो कहती हूँ( वैसे ये किसी और ने कहा है) कि जब हम बहुत बड़े-बड़े सपने देखते हैं, तो उससे छोटे सपने पूरे हो जाते हैं, लेकिन यदि हम सपने ही छोटे देखेंगे, तो जहाँ हैं उसी जगह संतुष्ट होकर बैठ जाएँगे।
और इस विज्ञापन के लिए शाहरुख खान को लेना भी एक उदाहरणस्वरूप है(ऐसा मुझे लगता है, क्योंकि मुझे शाहरुख पसंद है), छोटी आँखें, मोटे होंठ, चौड़ी नाक वाला यह इनसान यदि अपने शुरुआती दिनों में टीवी सीरियल से संतुष्ट होकर बैठ जाता तो?????? तो क्या थोड़ा-सा और विश किया और आज “फौजी” के अभिमन्यु राय से किंग खान बन गया। इसलिए............. 'Don't be Santusht… Wish Karo, Dish Karo'

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