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8 दिसंबर, 2007


ब्लॉग्स (1)
कल शाम बच्चे दीवाली की बची हुई फुलझडियाँ जला रहे थे, उनके चेहरे पर आई हँसी के फव्वारे चारो ओर फैले हुए थे। हम भी उनके आनंद में शामिल हो गए। घर के सभी लोग खुश थे.....मैं भी। फुलझड़ियाँ खतम, लेकिन उनका आनंद अभी भी उछाल भर रहा था, सो मेरी बेटी एक अगरबत्ती ... आगे पढ़ें...