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5 दिसंबर, 2007


ब्लॉग्स (2)
उदासी उतना उदास नहीं करती, जितना उदासी आ गई, यह बात उदास करती है। उदासी की तो अपनी कुछ खूबियाँ हैं, अपने कुछ रहस्य हैं। अगर उदासी स्वीकार हो तो उदासी का भी अपना मजा है। मुझे कहने दो इसी तरह, कि उदासी का भी अपना मजा है। क्योंकि उदासी में एक शांति है, एक ... आगे पढ़ें...

एक समय था जब लगता था कि कुछ कायनाती कण हवा से होते हुए साँसों में घुल रहे हैं। मुझे पवित्रता की सुगंध से सराबोर लगती थी अपनी ही देह अक्सर, फिर न जाने क्या हुआ कि मैं कण कण बिखरती रही, घुलती रही मिट्टी में...और सूखती रही बंजर धरती की तरह............. एक ... आगे पढ़ें...