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4 दिसंबर, 2007


ब्लॉग्स (3)
प्रेम, विवाह और ओशो जब ओशो का यह लेख लोगों को पढ़वाया, तो सब ने एक ही बात कही, ये तो ओशो है, इसमें आप कहाँ हो? अब उनके लिए मुझे यह जवाब लिखना पड़ा...बहुत मुश्किल काम था ओशो के छोड़े गए सवाल का जवाब लिखना, क्योंकि न तो मैं प्रेम को परिभाषित कर सकती हूँ, न ... आगे पढ़ें...

मैं कई सदियों तक जीती रही तुम्हारे विचारों का घुंघट अपने सिर पर ओढे, मैं कई सदियों तक पहने रही तुम्हारी परम्पराओं का परिधान, कई सदियों तक सुनती रही तुम्हारे आदेशों को, दोहराती रही तुम्हारे कहे शब्द, कोशिश करती रही तुम जैसा बनने की। तुम्हारे शहर ... आगे पढ़ें...

प्रेम का मतलब है: पल-पल जीना। प्रेम का मतलब है कि आज मैं आपको प्रेम करता हूँ, लेकिन कल का क्या भरोसा! कल के लिए मैं आज से कैसे निर्णय ले सकता हूँ! और मैं कल क्या करूँगा, उसका मैं आज से कैसे सुनिश्चित आश्वासन दे सकता हूँ! इसलिए प्रेम मोमेंट टु मोमेंट ... आगे पढ़ें...