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3 दिसंबर, 2007


ब्लॉग्स (2)
आज पहली बार प्रतीत हुआ, प्रेम किसे कहते है...... ओशो को बहुत बार पढ़ा है, सिर्फ पढ़कर ही मुग्ध हो जाया करती थी, लेकिन आज जैसे उनके द्वारा लिखा गया एक-एक शब्द मुझे अपने जीवन से गुजरता हुआ मेहसूस हो रहा है। दो लोगों का एक जैसा मेहसूस करना और एक दूसरे के ... आगे पढ़ें...

रात की चादर पर चुभता-सा ख़्वाब हुआ करता था कभी अब तकिया भी नींद में सराबोर-सा लगता है उजली रात के आसमान पर तारे भटकते थे कभी आज चाँद भी घर लौट आया-सा लगता है एक तन्हाई, दो बातें बस इतना-सा सामान है मेरे पास यादों की छत पर भी जाला-सा दिखता है आखरी ... आगे पढ़ें...