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दिसंबर 2007

 

• ले चलो............

ले चलो............ एक ऐसी जगह जहाँ मुझे दिखाई न दे भूख के पैबंद वाला मखमली जिस्म, ले चलो............. एक ऐसी जगह जहाँ सच कड़वा न हो, झूठ की मिठास से न आती हो उबकाई ले चलो.......... एक ऐसी जगह जहाँ ख़्वाब महकते हो लेकिन हक़ीकत से न आती हो दुर्गंध ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• भावनाएँ

भावनाएँ जब शब्दों में ढल जाती हैं तो मुकम्मल हो जाती है। यह कुछ शब्द यकायक ही ज़ुबां पर आ गए जब किसी ने मुझसे कहा कि जो दिल में है उसे कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं, आप ही कह दो। बहुत मुश्किल होता है अवर्णित प्रेम को वर्णित करना और वो भी उस व्यक्ति की ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• असमंजस बाबू

जो व्यक्ति रंगमंच से जुड़ा होता है, वह कहीं न कहीं समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ रहता है। अपने जीवन के अधूरेपन की कुंठा को रंगकर्म से जोड़कर पूर्णता के रस को घूँट घूँट पी रहा होता है। रंगकर्म के उस मंच पर उसके अपाहिज सपने बैसाखी लिए चढ़ते है, फिर मानो वहाँ ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरा कोना
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• Last Frustration

अधूरी कहानी में कोई नायक नहीं होता, न कोई नायिका, इसमें सिर्फ संवाद होते हैं, जो अकसर उन दो लोगों के बीच होते हैं, जिनको न कल्पनाओं का पूरा आसमान मिल पाता है न सच की धरातल पर खड़े होने की जगह। कुछ रिश्ते बस यूँ ही इन दो धूरियों के बीच अपना अस्तित्व तलाशते ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• Only For Ladies…..

जिसके नयनों की नदी में बह जाता हो हर दुख, आँचल की नम भूमि पर फूट आती हों, नन्हीं कोंपलें नए जीवन का संदेश देती हुई, जिसकी बाँहों का आकाश सदा खुला रहता हो अरमानों के पंछियों के लिए, उस नारी की जब भी बात आती है, मैं गौरांवित हो जाती हूँ यह सोचकर कि मैं एक ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरा कोना
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• दूसरी दुनिया

वो जिद करती रही मैं खुश हूँ, तो खुशी को परिभाषित करूँ, मैं कहने ही वाली थी कि मेरी आँखें भर आई। मन प्रसन्न रहता है, तो शब्द चैन की नींद सो जाते हैं। ये बात मैं उसे नहीं समझा सकती थी। मेरी आँखों के आँसूं से वह मेरे खुश या उदास रहने का अनुमान लगाती रही। ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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• 'Don't be Santusht… Wish Karo, Dish Karo'

एक दिन यूँ ही दिनभर की परेशानियों से परेशान होकर रात को टीवी देखने लगी। अचानक शाहरुख खान आता है और कहता है- Dont be Santusht… Wish Karo, Dish Karo मैं खुश...Of course शाहरुख को देखकर, लेकिन उससे ज्यादा डिश टीवी के उस स्लोगन से .......... थोड़ा और विश करो। ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरा कोना
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• अधूरे संवाद

शब्दों की चरम सीमा को छूकर लौट आई हूँ खामोशी के पेहरन में, जैसे कोई आँगन की मिट्टी को माथे पर लगाकर अनजाने सफर को निकलता है.....................   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• जादू की पुड़िया

श्रेणियाँ: मेरी दुनिया
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• उदासी, आनंद, ओशो और मैं

कल शाम बच्चे दीवाली की बची हुई फुलझडियाँ जला रहे थे, उनके चेहरे पर आई हँसी के फव्वारे चारो ओर फैले हुए थे। हम भी उनके आनंद में शामिल हो गए। घर के सभी लोग खुश थे.....मैं भी। फुलझड़ियाँ खतम, लेकिन उनका आनंद अभी भी उछाल भर रहा था, सो मेरी बेटी एक अगरबत्ती ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• उदासी, आनंद और ओशो

उदासी उतना उदास नहीं करती, जितना उदासी आ गई, यह बात उदास करती है। उदासी की तो अपनी कुछ खूबियाँ हैं, अपने कुछ रहस्य हैं। अगर उदासी स्वीकार हो तो उदासी का भी अपना मजा है। मुझे कहने दो इसी तरह, कि उदासी का भी अपना मजा है। क्योंकि उदासी में एक शांति है, एक ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• श्राप

एक समय था जब लगता था कि कुछ कायनाती कण हवा से होते हुए साँसों में घुल रहे हैं। मुझे पवित्रता की सुगंध से सराबोर लगती थी अपनी ही देह अक्सर, फिर न जाने क्या हुआ कि मैं कण कण बिखरती रही, घुलती रही मिट्टी में...और सूखती रही बंजर धरती की तरह............. एक ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• प्रेम, विवाह, ओशो और मैं

प्रेम, विवाह और ओशो जब ओशो का यह लेख लोगों को पढ़वाया, तो सब ने एक ही बात कही, ये तो ओशो है, इसमें आप कहाँ हो? अब उनके लिए मुझे यह जवाब लिखना पड़ा...बहुत मुश्किल काम था ओशो के छोड़े गए सवाल का जवाब लिखना, क्योंकि न तो मैं प्रेम को परिभाषित कर सकती हूँ, न ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• क्यों?

मैं कई सदियों तक जीती रही तुम्हारे विचारों का घुंघट अपने सिर पर ओढे, मैं कई सदियों तक पहने रही तुम्हारी परम्पराओं का परिधान, कई सदियों तक सुनती रही तुम्हारे आदेशों को, दोहराती रही तुम्हारे कहे शब्द, कोशिश करती रही तुम जैसा बनने की। तुम्हारे शहर ...   और पढ़ें...
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• प्रेम, विवाह और ओशो

प्रेम का मतलब है: पल-पल जीना। प्रेम का मतलब है कि आज मैं आपको प्रेम करता हूँ, लेकिन कल का क्या भरोसा! कल के लिए मैं आज से कैसे निर्णय ले सकता हूँ! और मैं कल क्या करूँगा, उसका मैं आज से कैसे सुनिश्चित आश्वासन दे सकता हूँ! इसलिए प्रेम मोमेंट टु मोमेंट ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अमृता और ओशो
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• अलौकिक प्रेम

आज पहली बार प्रतीत हुआ, प्रेम किसे कहते है...... ओशो को बहुत बार पढ़ा है, सिर्फ पढ़कर ही मुग्ध हो जाया करती थी, लेकिन आज जैसे उनके द्वारा लिखा गया एक-एक शब्द मुझे अपने जीवन से गुजरता हुआ मेहसूस हो रहा है। दो लोगों का एक जैसा मेहसूस करना और एक दूसरे के ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: अधूरी कहानियाँ
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• गर्दन पर खरोंच

रात की चादर पर चुभता-सा ख़्वाब हुआ करता था कभी अब तकिया भी नींद में सराबोर-सा लगता है उजली रात के आसमान पर तारे भटकते थे कभी आज चाँद भी घर लौट आया-सा लगता है एक तन्हाई, दो बातें बस इतना-सा सामान है मेरे पास यादों की छत पर भी जाला-सा दिखता है आखरी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: दो दुनिया
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